Hindi story for kids-दयालु राजकुमारी और जादुई चिड़िया

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दयालु राजकुमारी और जादुई चिड़िया : जहाँ कल्पना उड़ान भरती है! Hindi story for kids 

हेलो दोस्तो मेरा नाम है रामकृष्ण भोसले आप सभी का हमारे कहाणी साइट पर स्वागत है आज आपके लिए बेस्ट Hindi story for kids लेकर आया आपको कहाणी पढकर कैसा लगा यह कमेंट बॉक्स मे जरुर बताए चलो कहाणी के और बढते है ।Hindi story for kids
एक बार की बात है, हिमालय की ऊँची-नीची पहाड़ियों के बीच छिपे एक राज्य में राजकुमारी इंदिरा का राज चलता था. वो सचमुच में दयालुता की मूर्ति थीं. उनके दिल में हर प्राणी के लिए स्नेह झलकता था, चाहे वो जंगल का शेर हो या बगीचे का कीट. एक हल्की हवा उनके बालों को सहलाती थी और उनकी हँसी झरने की आवाज़ से मिलती-जुलती थी.

 

एक पावस भरी सुबह, जब घास पर मोतियों की माला बिखरी पड़ी थी, राजकुमारी इंदिरा जंगल की सैर पर निकलीं. हवा में पत्तियों की सरसराहट एक खूबसूरत गीत की तरह बज रही थी. तभी, उनकी नज़र टूटी एक घायल चिड़िया पर. उसका एक पंख खून से लथपथ था और वो जमीन पर तड़प रही थी. राजकुमारी का कोमल हृदय द्रवित हो गया. उसने बड़ी सावधानी से चिड़िया को उठाया और अपने महल ले आई.

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महल की नर्म पलंग पर चिड़िया लेट गई. राजकुमारी ने बड़े स्नेह से उसके घावों का इलाज किया. दिन-रात उसकी सेवा की, ताज़े फल खिलाए और प्यार भरे नغمों से सुलाया. कुछ ही दिनों में, चिड़िया ठीक हो गई. उसके घाव भर गए और पंख फिर से हवा में तैरने को बेताब थे.

 

चिड़िया जाने से पहले, राजकुमारी के हाथों में उसने अपना एक पंख रख दिया. वह पंख चटका नहीं था, बल्कि हल्का-फुल्का और चमकदार था, मानो किसी जादुई धूप में नहाया हो. “यह तुम्हारे दयालुता के बदले में,” चिड़िया ने बोलते हुए कहा, जो इस जादुई पंख की बदौलत राजकुमारी को समझ आए. “इसे पहन लो, यह तुम्हें किसी भी रूप में बदलने की शक्ति देगा.”Hindi story for kids 

और जब चिड़िया उड़कर पहाड़ों के पीछे छिप गई, राजकुमारी इंदिरा ने जादुई पंख उठाया. उनकी आँखों में चमक थी, उत्सुकता थी. उसने पंख पहना और उसी पल, वो एक तितली में बदल गई! रंग-बिरंगे पंख खोलकर, वो हवा में नाचने लगी, जंगल के फूलों को छूती हुई. ये जादुई अनुभव ने उसकी कल्पना को और भी उड़ा दिया.

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लेकिन जल्द ही, एक खबर ने उसके राज्य की खुशियों को दुख में बदल दिया. एक दुष्ट जादूगर ने राज्य पर हमला कर दिया था. उसके मंत्रों से जंगल सूख गए थे, फसल बर्बाद हो गए थे और लोगों में डर व्याप्त था. राजकुमारी जानती थी कि सीधे तौर पर उसका सामना करना मुश्किल होगा.

तभी उसे जादुई पंख का ख्याल आया. उसने एक छोटी चींटी का रूप ले लिया और जादूगर के महल में घुस गई. दीवारों के दरारों से होकर वो उसके गुप्त कमरे तक पहुंची. वहां उसने देखा कि जादूगर एक जादुई पत्थर की पूजा कर रहा था, उसी पत्थर से उसकी शक्ति आती थी.

चींटी के रूप में राजकुमारी ने दीवार पर चढ़कर पत्थर को छूआ. उसकी हल्की सी स्पर्श से जादू टूट गया और पत्थर काला पड़ गया. जादूगर की शक्ति कम हो गई, उसकी बुराई का बादल छंट गया. बाहर निकलकर, राजकुमारी ने अपने असली रूप में प्रकट होकर लोगों को साहस दिया और जादूगर को हरा दिया.

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इस तरह, दयालु राजकुमारी ने राज्य को बचाया. जादुई पंख ने उनकी कल्पना को उड़ाया और साहस का मार्ग दिखाया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती.

एक दिन, राजकुमारी इंदिरा को जंगल से एक फुसफुहाट सुनाई दी. एक बूढ़ा पेड़ रो रहा था, उसकी टहनियां सूख रही थीं और पत्ते मुरझा रहे थे. पेड़ ने बताया कि जंगल की जलधारा एक कांटेदार झाड़ी से अवरुद्ध हो गई है और उसका जीवन खतरे में है.

 

राजकुमारी समझ गई कि राज्य का असली नायक बनने के लिए सिर्फ शत्रुओं को हराना काफी नहीं है. प्रकृति की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है. फिर से जादुई पंख का सहारा लेते हुए, वो एक पंछी में बदल गई और जलधारा तक पहुंची. वहां कांटों का जंगल उसके रास्ते को रोक रहा था.

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लेकिन राजकुमारी हार नहीं मानी. उसने अपने नन्हे नाखूनों से धीरे-धीरे, एक-एक कर कांटों को हटाया. उसके पंख खून से लथपथ हो गए, लेकिन हवा में लहराते रहे. आखिरकार, जलधारा फिर से बहने लगी. पेड़ की सूखी शाखाएं नमी पाकर हरी हो गईं और उसके पत्तों में एक आभारी मुस्कान खिली.

खबर जंगल में फैल गई और हर प्राणी राजकुमारी इंदिरा की दयालुता और साहस का गुणगान करने लगा. उन्होंने सीखा कि असली नायक वो होते हैं, जो दूसरों की खुशियों के लिए अपनी खुशियां कुर्बान कर देते हैं. राजकुमारी इंदिरा ने जादुई पंख की शक्ति का इस्तेमाल सिर्फ खतरों से बचने के लिए नहीं किया, बल्कि प्रकृति और उसके प्राणियों की रक्षा के लिए भी किया.

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ये कहानी बच्चों को सीखाती है कि कल्पना का उड़ान हमें न सिर्फ रोमांचक सफर पर ले जा सकता है, बल्कि दूसरों की मदद और प्रकृति की देखभाल के लिए भी प्रेरित कर सकता है. जब दयालुता और बुद्धि आपस में मिलते हैं, तो बड़े से बड़े चमत्कार हो सकते हैं.

तो चलिए, हम भी अपने दिलों में राजकुमारी इंदिरा जैसी दयालुता जगाएं और कल्पना के पंखों पर सवार होकर दुनिया को एक और खूबसूरत जगह बनाने का रास्ता खोजें.

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