pola festival – pola kab hai 2024 पोला त्यौहार कब है और पोला त्यौहार क्यों मनाया जाता है?-very best imformed

हॅलो दोस्तो मेरा नाम है रामकृष्ण भोसले और आज हम बात करेगे pola kab hai 2024-के बारे मे -पोला से हर सबंध मे तो चलिए आगे बढते है-भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां की अर्थव्यवस्था और संस्कृति में कृषि का विशेष महत्व है। कृषि कार्यों में मवेशियों का योगदान अतुलनीय है। बैल और गाय जैसे मवेशी सदियों से किसानों के सच्चे सहयोगी रहे हैं। इन मवेशियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी पूजा करने के लिए भारत में कई त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण त्योहार है पोला।

त्यौहार का नाम बैल पोला
त्यौहार का अन्य नाम पिठोरी अमावस्या, मोठा पोला, तनहा पोला
कहां मनाया जाता है महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ कर्नाटक
2024 में कब है-pola kab hai2024 2 सितंबर को
पूजा होती है बैल एवं घोड़ों की
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pola kab hai 2024 में? उत्सव का महत्व, परंपराएँ और मनाने का तरीका

हर साल की तरह, 2024 में भी पोला का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। लेकिन पोला कब है 2024 में? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है। तो चलिए, आज हम आपको बताते हैं कि पोला कब मनाया जाता है, इस उत्सव का क्या महत्व है, इसकी कौन-सी परंपराएँ हैं और इसे कैसे मनाया जाता है।

Table of Contents

पोला की तिथि 2024: pola kab hai 2024-pola festival kab hai 2024

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पोला हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। 2024 में भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 2 सितंबर को पड़ रही है। इसलिए, पोला का उत्सव 2 सितंबर 2024 को मनाया जाएगा।

पोला का महत्व: pola kab hai 2024-pola festival kab hai 2024

पोला मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्रों में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह खेती, पशुधन और मिट्टी के महत्व को दर्शाता है। इस दिन किसान अपने बैलों की पूजा करते हैं, उन्हें सजाते हैं और उनके साथ मिलकर मस्ती करते हैं। यह आभार व्यक्त करने का एक तरीका है, क्योंकि बैल सदियों से खेती में उनकी मदद करते आ रहे हैं। पोला का त्योहार न केवल किसानों और बैलों के बीच के बंधन को मजबूत करता है, बल्कि ग्रामीण समुदाय में भी खुशी और उल्लास का माहौल बनाता है।

पोला की परंपराएँ:  pola kab hai 2024-pola festival kab hai 2024

पोला की कई खास परंपराएँ हैं, जो इस त्योहार को और भी अनोखा बनाती हैं। इनमें से कुछ मुख्य परंपराएँ इस प्रकार हैं:

  • बैलों को स्नान कराना और सजाना: पोला के दिन सबसे पहले बैलों को नहलाकर साफ किया जाता है। इसके बाद उन्हें रंगीन कपड़े, फूल, मोर पंख और घंटियों से सजाया जाता है।
  • बैलों की पूजा करना: बैलों को सजाने के बाद उनकी पूजा की जाती है। पूजा में दूध, दही, फूल और मिठाई चढ़ाई जाती है।
  • बैल दौड़ का आयोजन: कुछ क्षेत्रों में बैल दौड़ का आयोजन भी किया जाता है। यह एक परंपरागत खेल है, जिसमें जीतने वाले बैल के मालिक को पुरस्कार दिया जाता है।
  • नृत्य और गायन: पोला के दिन लोग पारंपरिक नृत्य करते हैं और गीत गाते हैं। यह खुशी और उत्सव का वातावरण बनाता है।
  • विशेष भोजन: पोला के दिन खास तरह का भोजन बनाया जाता है। इसमें लाप्सी, खीर, पूरनपोली और पकौड़े शामिल हो सकते हैं।

पोला मनाने का तरीका: pola kab hai 2024-pola festival kab hai 2024

यदि आप भी इस साल पोला का त्योहार मनाना चाहते हैं, तो आप इन तरीकों से इसे मना सकते हैं:

  • अपने आस-पास के किसी गाँव में जाकर पोला के कार्यक्रमों में भाग लें।
  • घर पर ही बैलों की पूजा करें और उन्हें सजाएँ।
  • पारंपरिक व्यंजन बनाकर अपने परिवार के साथ मिलकर भोजन करें।
  • पोला के गीत गाकर और नृत्य करके उत्सव का माहौल बनाएँ।pola kab hai 2024 -pola festival 2024
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  • पोला त्यौहार क्यों मनाया जाता है, महत्व (Pola Festival Mahatva in Hindi)

पोला त्यौहार भारत के कुछ राज्यों में, विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मनाया जाता है। यह त्यौहार भाद्रपद मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जो आमतौर पर अगस्त या सितंबर के महीने में पड़ता है।

पोला त्यौहार का महत्व: pola kab hai 2024-pola festival kab hai 2024

पोला त्यौहार भारत के कुछ राज्यों में, विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मनाया जाता है। यह त्यौहार भाद्रपद मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जो आमतौर पर अगस्त या सितंबर के महीने में पड़ता है।

पोला त्यौहार का महत्व:  pola kab hai 2024-pola festival kab hai 2024

  • कृषि का त्यौहार: पोला त्यौहार मुख्य रूप से कृषि से जुड़ा हुआ है। यह त्यौहार किसानों द्वारा बैलों और भैंसों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है, जो खेती में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • शुभता और समृद्धि: पोला त्यौहार को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों और खेतों को सजाते हैं, और विशेष व्यंजन बनाते हैं।
  • पशुधन की पूजा: पोला त्यौहार के दिन लोग अपने पशुधन, विशेष रूप से बैलों और भैंसों की पूजा करते हैं। उन्हें नहलाया जाता है, सजाया जाता है, और उन्हें विशेष भोजन खिलाया जाता है।
  • सामाजिक समरसता: पोला त्यौहार सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इस दिन लोग एक दूसरे के घरों जाते हैं, और मिल-जुलकर भोजन करते हैं।

पोला त्यौहार की परंपराएं:

  • पशुधन की पूजा: पोला त्यौहार के दिन लोग अपने पशुधन, विशेष रूप से बैलों और भैंसों की पूजा करते हैं। उन्हें नहलाया जाता है, सजाया जाता है, और उन्हें विशेष भोजन खिलाया जाता है।
  • बैल दौड़: कुछ क्षेत्रों में, बैल दौड़ का आयोजन भी किया जाता है। यह एक रोमांचक खेल है, जिसमें लोग भाग लेते हैं और पुरस्कार जीतने का प्रयास करते हैं।
  • नृत्य और गायन: पोला त्यौहार के दिन लोग नृत्य और गायन करते हैं। यह त्यौहार के उत्साह और खुशी को बढ़ाता है।
  • विशेष व्यंजन: पोला त्यौहार के दिन लोग विशेष व्यंजन बनाते हैं। इनमें खीर, पूरनपोली, और पकौड़े शामिल हो सकते हैं।

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पोला त्यौहार भारत के कुछ राज्यों में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह त्यौहार कृषि, पशुधन, और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। पोला त्यौहार लोगों को खुशी और उत्साह प्रदान करता है, और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ता है.

  • कृषि का त्यौहार: पोला त्यौहार मुख्य रूप से कृषि से जुड़ा हुआ है। यह त्यौहार किसानों द्वारा बैलों और भैंसों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है, जो खेती में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • शुभता और समृद्धि: पोला त्यौहार को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों और खेतों को सजाते हैं, और विशेष व्यंजन बनाते हैं।
  • पशुधन की पूजा: पोला त्यौहार के दिन लोग अपने पशुधन, विशेष रूप से बैलों और भैंसों की पूजा करते हैं। उन्हें नहलाया जाता है, सजाया जाता है, और उन्हें विशेष भोजन खिलाया जाता है।
  • सामाजिक समरसता: पोला त्यौहार सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इस दिन लोग एक दूसरे के घरों जाते हैं, और मिल-जुलकर भोजन करते हैं।

पोला त्यौहार की परंपराएं: pola kab hai 2024 -pola festival 2024

  • पशुधन की पूजा: पोला त्यौहार के दिन लोग अपने पशुधन, विशेष रूप से बैलों और भैंसों की पूजा करते हैं। उन्हें नहलाया जाता है, सजाया जाता है, और उन्हें विशेष भोजन खिलाया जाता है।
  • बैल दौड़: कुछ क्षेत्रों में, बैल दौड़ का आयोजन भी किया जाता है। यह एक रोमांचक खेल है, जिसमें लोग भाग लेते हैं और पुरस्कार जीतने का प्रयास करते हैं।
  • नृत्य और गायन: पोला त्यौहार के दिन लोग नृत्य और गायन करते हैं। यह त्यौहार के उत्साह और खुशी को बढ़ाता है।
  • विशेष व्यंजन: पोला त्यौहार के दिन लोग विशेष व्यंजन बनाते हैं। इनमें खीर, पूरनपोली, और पकौड़े शामिल हो सकते हैं।

पोला त्यौहार भारत के कुछ राज्यों में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह त्यौहार कृषि, पशुधन, और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। पोला त्यौहार लोगों को खुशी और उत्साह प्रदान करता है, और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ता है.

पोला त्यौहार मनाने का तरीका (Pola Festival Celebration)

पोला त्यौहार भारत के कुछ राज्यों में, विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मनाया जाता है। यह त्यौहार भाद्रपद मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जो आमतौर पर अगस्त या सितंबर के महीने में पड़ता है।

पोला त्यौहार मनाने के तरीके:

सुबह:

  • पशुधन को स्नान कराना: सुबह जल्दी उठकर, लोग अपने पशुधन, विशेष रूप से बैलों और भैंसों को नहलाते हैं।
  • पशुधन को सजाना: नहाने के बाद, पशुधन को रंगीन कपड़े, फूल, मोर पंख और घंटियों से सजाया जाता है।
  • पशुधन की पूजा: पशुधन को सजाने के बाद उनकी पूजा की जाती है। पूजा में दूध, दही, फूल और मिठाई चढ़ाई जाती है।

दोपहर:

  • बैल दौड़: कुछ क्षेत्रों में, बैल दौड़ का आयोजन भी किया जाता है। यह एक रोमांचक खेल है, जिसमें लोग भाग लेते हैं और पुरस्कार जीतने का प्रयास करते हैं।
  • नृत्य और गायन: लोग नृत्य और गायन करते हैं। यह त्यौहार के उत्साह और खुशी को बढ़ाता है।
  • विशेष व्यंजन: लोग विशेष व्यंजन बनाते हैं। इनमें खीर, पूरनपोली, और पकौड़े शामिल हो सकते हैं।

शाम:

  • परिवार और दोस्तों के साथ भोजन: लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर भोजन करते हैं।
  • मिठाई वितरण: लोग मिठाई वितरित करते हैं और एक दूसरे को त्यौहार की शुभकामनाएं देते हैं।

पोला त्यौहार मनाने का तरीका अलग-अलग क्षेत्रों में थोड़ा भिन्न हो सकता है।

यहां कुछ अतिरिक्त सुझाव दिए गए हैं जो आपको पोला त्यौहार मनाने में मदद कर सकते हैं:

  • अपने आस-पास के किसी गाँव में जाकर पोला के कार्यक्रमों में भाग लें।
  • घर पर ही बैलों की पूजा करें और उन्हें सजाएँ।
  • पारंपरिक व्यंजन बनाकर अपने परिवार के साथ मिलकर भोजन करें।
  • पोला के गीत गाकर और नृत्य करके उत्सव का माहौल बनाएँ।

पोला त्यौहार एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो कृषि, पशुधन, और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस त्यौहार को मनाने से हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी संस्कृति का सम्मान करने का अवसर मिलता है.

महाराष्ट्र में पोला पर्व मनाने का तरीका (Pola Festival in Maharashtra)pola kab hai 2024 -pola festival 2024

पोला पर्व महाराष्ट्र का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो भाद्रपद मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह त्यौहार बैलों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी पूजा करने के लिए मनाया जाता है।

महाराष्ट्र में पोला पर्व मनाने का तरीका:

सुबह:

  • बैलों को स्नान कराना: सुबह जल्दी उठकर, लोग अपने बैलों को नहलाते हैं।
  • बैलों को सजाना: नहाने के बाद, बैलों को रंगीन कपड़े, फूल, मोर पंख और घंटियों से सजाया जाता है।
  • बैलों की पूजा: बैलों को सजाने के बाद उनकी पूजा की जाती है। पूजा में दूध, दही, फूल और मिठाई चढ़ाई जाती है।
  • पंडितों द्वारा मंत्रों का उच्चारण: पंडितों द्वारा मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और बैलों का आशीर्वाद लिया जाता है।

दोपहर:

  • बैल दौड़: कुछ क्षेत्रों में, बैल दौड़ का आयोजन भी किया जाता है। यह एक रोमांचक खेल है, जिसमें लोग भाग लेते हैं और पुरस्कार जीतने का प्रयास करते हैं।
  • बैल गाड़ियों का जुलूस: कुछ जगहों पर, बैल गाड़ियों का जुलूस भी निकाला जाता है।
  • नृत्य और गायन: लोग नृत्य और गायन करते हैं। यह त्यौहार के उत्साह और खुशी को बढ़ाता है।
  • विशेष व्यंजन: लोग विशेष व्यंजन बनाते हैं। इनमें खीर, पूरनपोली, और पकौड़े शामिल हो सकते हैं।

शाम:

  • परिवार और दोस्तों के साथ भोजन: लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर भोजन करते हैं।
  • मिठाई वितरण: लोग मिठाई वितरित करते हैं और एक दूसरे को त्यौहार की शुभकामनाएं देते हैं।

महाराष्ट्र में पोला पर्व मनाने का तरीका थोड़ा भिन्न हो सकता है।

यहां कुछ अतिरिक्त सुझाव दिए गए हैं जो आपको पोला पर्व मनाने में मदद कर सकते हैं:

  • अपने आस-पास के किसी गाँव में जाकर पोला के कार्यक्रमों में भाग लें।
  • घर पर ही बैलों की पूजा करें और उन्हें सजाएँ।
  • पारंपरिक व्यंजन बनाकर अपने परिवार के साथ मिलकर भोजन करें।
  • पोला के गीत गाकर और नृत्य करके उत्सव का माहौल बनाएँ।

पोला पर्व एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो कृषि, पशुधन, और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस त्यौहार को मनाने से हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी संस्कृति का सम्मान करने का अवसर मिलता है.

कर्नाटक में पोला त्यौहार मनाने का तरीका (Pola Festival Celebration)

पोला त्यौहार कर्नाटक का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो भाद्रपद मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह त्यौहार बैलों, गायों और अन्य पशुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी पूजा करने के लिए मनाया जाता है।

कर्नाटक में पोला त्यौहार मनाने का तरीका:

सुबह:

  • पशुओं को स्नान कराना: सुबह जल्दी उठकर, लोग अपने पशुओं को नहलाते हैं।
  • पशुओं को सजाना: नहाने के बाद, पशुओं को रंगीन कपड़े, फूल, मोर पंख और घंटियों से सजाया जाता है।
  • पशुओं की पूजा: पशुओं को सजाने के बाद उनकी पूजा की जाती है। पूजा में दूध, दही, फूल और मिठाई चढ़ाई जाती है।
  • पंडितों द्वारा मंत्रों का उच्चारण: पंडितों द्वारा मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और पशुओं का आशीर्वाद लिया जाता है।

दोपहर:

  • बैल दौड़: कुछ क्षेत्रों में, बैल दौड़ का आयोजन भी किया जाता है। यह एक रोमांचक खेल है, जिसमें लोग भाग लेते हैं और पुरस्कार जीतने का प्रयास करते हैं।
  • बैल गाड़ियों का जुलूस: कुछ जगहों पर, बैल गाड़ियों का जुलूस भी निकाला जाता है।
  • नृत्य और गायन: लोग नृत्य और गायन करते हैं। यह त्यौहार के उत्साह और खुशी को बढ़ाता है।
  • विशेष व्यंजन: लोग विशेष व्यंजन बनाते हैं। इनमें खीर, पूरनपोली, और पकौड़े शामिल हो सकते हैं।

शाम:

  • परिवार और दोस्तों के साथ भोजन: लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर भोजन करते हैं।
  • मिठाई वितरण: लोग मिठाई वितरित करते हैं और एक दूसरे को त्यौहार की शुभकामनाएं देते हैं।

कर्नाटक में पोला त्यौहार मनाने का तरीका थोड़ा भिन्न हो सकता है।

यहां कुछ अतिरिक्त सुझाव दिए गए हैं जो आपको पोला त्यौहार मनाने में मदद कर सकते हैं:

  • अपने आस-पास के किसी गाँव में जाकर पोला के कार्यक्रमों में भाग लें।
  • घर पर ही पशुओं की पूजा करें और उन्हें सजाएँ।
  • पारंपरिक व्यंजन बनाकर अपने परिवार के साथ मिलकर भोजन करें।
  • पोला के गीत गाकर और नृत्य करके उत्सव का माहौल बनाएँ।

पोला त्यौहार एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो कृषि, पशुधन, और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस त्यौहार को मनाने से हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी संस्कृति का सम्मान करने का अवसर मिलता है.

आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पोला त्यौहार मनाने का तरीका (Pola Festival Celebration)pola kab hai 2024 -pola festival 2024

पोला त्यौहार आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाद्रपद मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह त्यौहार बैलों, गायों और अन्य पशुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी पूजा करने के लिए मनाया जाता है।

आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पोला त्यौहार मनाने का तरीका: pola kab hai 2024 -pola festival 2024

सुबह:

  • पशुओं को स्नान कराना: सुबह जल्दी उठकर, लोग अपने पशुओं को नहलाते हैं।
  • पशुओं को सजाना: नहाने के बाद, पशुओं को रंगीन कपड़े, फूल, मोर पंख और घंटियों से सजाया जाता है।
  • पशुओं की पूजा: पशुओं को सजाने के बाद उनकी पूजा की जाती है। पूजा में दूध, दही, फूल और मिठाई चढ़ाई जाती है।
  • पंडितों द्वारा मंत्रों का उच्चारण: पंडितों द्वारा मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और पशुओं का आशीर्वाद लिया जाता है।

दोपहर:

  • बैल दौड़: कुछ क्षेत्रों में, बैल दौड़ का आयोजन भी किया जाता है। यह एक रोमांचक खेल है, जिसमें लोग भाग लेते हैं और पुरस्कार जीतने का प्रयास करते हैं।
  • बैल गाड़ियों का जुलूस: कुछ जगहों पर, बैल गाड़ियों का जुलूस भी निकाला जाता है।
  • नृत्य और गायन: लोग नृत्य और गायन करते हैं। यह त्यौहार के उत्साह और खुशी को बढ़ाता है।
  • विशेष व्यंजन: लोग विशेष व्यंजन बनाते हैं। इनमें खीर, पूरनपोली, और पकौड़े शामिल हो सकते हैं।

शाम:

  • परिवार और दोस्तों के साथ भोजन: लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर भोजन करते हैं।
  • मिठाई वितरण: लोग मिठाई वितरित करते हैं और एक दूसरे को त्यौहार की शुभकामनाएं देते हैं।

आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पोला त्यौहार मनाने का तरीका थोड़ा भिन्न हो सकता है।

यहां कुछ अतिरिक्त सुझाव दिए गए हैं जो आपको पोला त्यौहार मनाने में मदद कर सकते हैं:

  • अपने आस-पास के किसी गाँव में जाकर पोला के कार्यक्रमों में भाग लें।
  • घर पर ही पशुओं की पूजा करें और उन्हें सजाएँ।
  • पारंपरिक व्यंजन बनाकर अपने परिवार के साथ मिलकर भोजन करें।
  • पोला के गीत गाकर और नृत्य करके उत्सव का माहौल बनाएँ।

पोला त्यौहार एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो कृषि, पशुधन, सामाजिक समरसता और संस्कृति का प्रतीक है। इस त्यौहार को मनाने से हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी संस्कृति का सम्मान करने का अवसर मिलता है.

पोला त्यौहार का संबंध भगवान श्री कृष्ण से जोड़कर देखा जाता है

पोला त्यौहार, जो भाद्रपद मास की अमावस्या को मनाया जाता है, का संबंध भगवान श्री कृष्ण से भी जोड़ा जाता है।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाकर अपनी प्रजा को इंद्रदेव के क्रोध से बचाया था। इस घटना के बाद, गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का प्रचलन शुरू हुआ।pola kab hai 2024 -pola festival 2024

पोला त्यौहार को इसी घटना से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाने के बाद गायों और बैलों को चराया था। इस दिन से, किसान अपने बैलों को कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए पोला त्यौहार मनाने लगे।

कथा का महत्व-pola kab hai 2024 -pola festival 2024

पोला त्यौहार से जुड़ी यह कथा हमें कृतज्ञता, प्रेम और भक्ति का महत्व सिखाती है। यह हमें याद दिलाती है कि हमें उन सभी चीजों के लिए कृतज्ञ रहना चाहिए जो हमारे जीवन में हैं, चाहे वे जीवित हों या निर्जीव।

पोला त्यौहार और भगवान श्री कृष्ण के बीच संबंध:

  • भगवान श्री कृष्ण को ग्वालों का देवता माना जाता है।
  • ग्वाले गायों और बैलों को पालते थे और उनकी देखभाल करते थे।
  • पोला त्यौहार गायों और बैलों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का त्यौहार है।
  • इस त्यौहार को भगवान श्री कृष्ण के प्रति सम्मान और भक्ति व्यक्त करने का भी तरीका माना जाता है।

निष्कर्ष:

पोला त्यौहार कृषि, पशुधन, सामाजिक समरसता और संस्कृति का प्रतीक है। यह त्यौहार हमें भगवान श्री कृष्ण की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का भी अवसर प्रदान करता है.

 

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